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श्रावण एवं सोमवार

Posted On: 20 Jul, 2011 ज्योतिष में

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श्रावण एवं सोमवार
स्वर्ग अपवर्ग के सुख की प्राप्ति तथा विविध दुःख आपदा से मुक्ति दिलाने वाला श्रावण के सोमवार का व्रत क्या क्या नहीं दे सकता इसे शास्त्र एवं विविध ग्रंथो ने इस प्रकार कहा है.
शिवपूजा सदा लोके हेतु: स्वर्गापवर्गयो: . सोमवासरे विशेषेण प्रदोषे च गुणान्विते . श्रावणे चैत्र वैशाखे ऊर्जे वा मार्गशीर्षके . प्रथमे सोमवासरे तद्ग्रिह्नियाद व्रतमुत्तमं. केवलं चापि ये कुर्यु: सोमवासरे शिवार्चानम. न तेषाम विद्यते किन्चिदिहामुत्र च दुर्लभाम.
श्रावण के सोमवार की महत्ता को स्वयं आशुतोष भगवान शिव ने पार्वती से कहा है. माता पार्वती ने भगवान शिव से पूछा कि हे भगवान शिव विविध पूजा पाठ करने से मनुष्य अनेक दुःख एवं कष्ट से छूट जाता है. फिर भी कुछ प्रारब्ध के दुःख ऐसे है जो किसी भी पूजा पाठ से नहीं छूटते. जैसे ब्रह्म ह्त्या, कुल दोष, देव दोष, सर्प दोष आदि. क्या ऐसा भी कोई व्रत अथवा उपवास या पूजा है जिसके करने से इन विविध भयंकर कष्टों से मुक्ति मिल जाए? भगवान शिव ने कहा कि हे पार्वती पार ब्रह्म परमेश्वर भगवान विष्णु ने कहा है कि श्रावण माह के सोमवार को जो भी व्यक्ति शिवलिंग रूप भगवान शिव की अर्चना करेगा उसे कोई भी विघ्न बाधा नहीं होगा. यहाँ तक कि स्वयं यमराज भी ऐसे पूजा करने वालो से घबराते है.
“उपोषितः शुचिर्भूत्वा सोमवारे जितेन्द्रियः . वैदिकैर्लोकिकैर्मत्रैर्विधिवत्पूजयेच्छिवम. ब्रह्मचारी गृहस्थो वा कन्यावापि सभतृका. विधवा वापि संपूज्य लभते वरमीप्सितम.
दक्षिण भारत के एक तमिल ग्रन्थ तथा गौर्योपाख्यान के अलावा शिवतन्त्रम में बताया गया है कि निम्नांकित पांच सामग्री से पूजा करने से मनुष्य को पांच वरदान तो तत्काल ही मिल जाते है. यह सामग्री है (1)- बेल पत्र – यहाँ यह ध्यान रखना है कि बेल पत्र साफ़, चिकना, बिना कटा फटा तथा तीन पत्तो वाला होना चाहिए. (2)- फूल- लाल एवं काले रंग का नहीं होना चाहिए. भर सक हो सके तो सफ़ेद फूल का ही प्रयोग करें. (3)- जल- किसी तीर्थ का जल हो तो और अच्छा. (4)- धुप- भर सक अगर बत्ती का प्रयोग न करें कारण यह है कि अगर बत्ती में बांस या किसी अशुभ पेड़ की लकड़ी लगी होती है. इस लिए अच्छा होगा कि धुप का ही प्रयोग करें. (5)- दीप- दीपक यदि कच्चे मिट्टी का हो तो सबसे अच्छा. तथा यदि घी के स्थान पर तिल के तेल का प्रयोग हो तो सबसे अच्छा.
एक बात यहाँ ध्यान देने की है कि यदि उपरोक्त वस्तुओं के अलावा और भी सामग्री शिवलिंग पर चढ़ानी हो तो वहां पर सावधानी बरतनी पड़ती है. जैसे चन्दन चढाने के बाद हल्दी नहीं चढ़ा सकते. चावल चढाने के बाद गुड नहीं चढ़ा सकते. या बेलपत्र चढाने के बाद चन्दन या घी, हल्दी नहीं चढ़ाया जाता. इन सब में क्रम होता है. किन्तु यदि पूर्वोक्त मात्र पांच सामग्री ही चढ़ानी हो तो पहले बेलपत्र, फिर फूल, तब जल उसके बाद धुप एवं अंत में दीप दिखाते है. इन पांच सामग्रियों से पूजा का सद्यः फल बताया गया है कि (1)-पति/पत्नी को दीर्घायु, (2)- मन चाही पत्नी/ पति की प्राप्ति , (3)- देवदोष/ सर्पदोष से मुक्ति (4)- ब्रह्मह्त्या से मुक्ति (5)- अकाल मृत्यु से छुट कारा.
बृहत्शिवतांडव में इसका विशेष उल्लेख मिलता है.

By-

Pundit R. K. Rai

M.Sc. (Biochemistry)

M.A. (Vedic Astrology)

Former Interviewer- NCAER ( A Home Ministry Enterprises)

Tele- 0532-2500272, Mobile-9889649352

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1 प्रतिक्रिया

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nishamittal के द्वारा
July 21, 2011

जानकारी प्रदान के लिए धन्यवाद.


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