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राशि एवं भविष्यफल

Posted On: 21 Jul, 2011 ज्योतिष में

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जैसा कि मै अपने पहले के लेखो में लिख चुका हूँ, राशि का अर्थ होता है ढेरी, संग्रह, समूह, भण्डार या ढेर सारा. ठीक उसी प्रकार राशिफल भी एक समूह का होता है. न कि किसी एक व्यक्ति का. एक ही राशि में आने वाले का भविष्य फल अलग अलग होता है. उदाहरण के लिए एक मेष राशि को ही लेते है. मेष राशि में सवा दो नक्षत्र आते है. तब जा कर मेष राशि पूरी होती है. अश्विनी नक्षत्र पूरा, भरणी नक्षत्र पूरा, एवं कृतिका का पहला चरण मिल कर मेष राशि बनती है. प्रत्येक नक्षत्र के चार चरण होते है. प्रत्येक चरण के लिए एक एक अक्षर निर्धारित है. जैसे चू, चे, चो एवं ला ये चार अश्विनी नक्षत्र के चरण है. ली, लू, ले एवं लो ये भरणी नक्षत्र के चरण है. अ, ई, ऊ एवं ए ये चार कृतिका नक्षत्र के चरण है. इसमें चू, चो, चे, ला, ली, लू, ले, लो एवं अ ये सवा दो नक्षत्र मिल कर एक मेष राशि बनाते है. अब हम पहले शास्त्रों एवं विविध ज्योतिषीय ग्रंथो में जो मेष राशि एवं इन नक्षत्रो के फल बताये गए है उन्हें देखते है. यहाँ हम एक ही प्रासिद्ध प्राचीन ज्योतिषीय ग्रन्थ “वृद्ध यवन जातकम” के विविध अध्यायों से देखते है.
मेषोदये असत्यपरा नृशंसा नारी भवेत् क्रोध युता सदैव. श्लेष्माधिका निष्ठुरवाक्ययुक्ता सदा विरक्ता निजबन्धु वर्गे. (वृद्ध यवन जातकम अध्याय 59 श्लोक 1)
अर्थात यदि किसी स्त्री का जन्म मेष लग्न में हुआ हो तो वह स्त्री असत्य आचरण करने वाली , निर्दय स्वभाव वाली, अत्यंत क्रोधी वृत्ति वाली, अधिक कफ से पीड़ित, निष्ठुर वचन बोलने वाली, अपने बन्धु वर्ग से सदैव विरक्त रहने वाली होती है.
इसी मेष राशि में आने वाली अश्विनी नक्षत्र का फल देखते है
जाताश्विनीषु प्रमदा मनोज्ञा प्रभूतकोषा प्रिय दर्शाना च. प्रियंवदा सर्वसहाभिरामा शुद्ध्यान्विता देवगुरुप्रसक्ता.
(वृद्ध यवन जातकम अध्याय 61 श्लोक 1)
अर्थात यदि किसी स्त्री का जन्म अश्विनी नक्षत्र में हो तो वह अत्यंत मनोहर आकृति वाला, अधिक धन संचय करने वाली, दिखने में आकर्षक, प्रिय भाषण करने वाली, अत्यंत धीर एवं सर्वसहा, अभिराम व्यक्तित्व वाली, श्रद्धाचरण करने वाली, देवताओं व गुरुओं का आदर करने वाली होती है.
इसी मेष राशि में आने वाली भरणी नक्षत्र का फल देखते है.
स्त्रीवर्ग युक्ता भरणीषु जाता भवेन्नृशंसा कलह प्रिया च. सुदुष्टचिन्ता विभवैर्विहीना क्षतप्रतापा सततं कुचैला.
(वृद्ध यवन जातकम अध्याय 61 श्लोक 2)
अर्थात जिस स्त्री के जन्म समय में भरणी नक्षत्र हो वह अनेक स्त्रियों का सहयोग पाने वाली, नृशंस आचरण करने वाली, कलह प्रिया, दुष्टता युक्त बातें सोचने वाली, वैभव रहित जीवन बिताने वाली प्रताप हीन एवं मैली कुचैली रहने वाली होती है.
इसी मेष राशि में कृतिका नक्षत्र का भी एक चरण होता है. इसका फल भी इसी अध्याय के तीसरे श्लोक में देखते है-
जाता भवेत् स्त्री त्वथ कृतिकासु कोपाधिका युद्ध परा विरक्ता. प्रद्वेषिणी बंधुजनेन हीना श्लेष्माधिका क्षांततनु: सदैव.
अर्थात जिसके जन्म के समय में कृतिका नक्षत्र हो वह अत्यन क्रोधी स्वभाव वाली, युद्ध परायण, विरक्त भाव रखने वाली, सबसे द्वेष रखने वाली, अपने बन्धु जानो से हीन, कफ प्रधान प्रकृति पतले दुबले शरीर वाली होती है.
अब ऊपर के शास्त्रीय कथनों को देखते है. एक ही राशि मेष में जन्म लेने वाली महिला प्रिय भाषण करने वाली मनोहर स्वभाव वाली, सत्य आचरण करने वाली एवं आकर्षक व्यक्तित्व वाली होती है. (ऊपर के अश्विनी नक्षत्र का फल देखें) उसी मेष राशि में जन्म लेने वाली महिला क्रोधी स्वभाव वाली, कर्कश वाणी बोलने वाली तथा दुबले पय्ताले शरीर वाली कैसे हो सकती है? (देखें भरणी एवं कृतिका नक्षत्र का फल) एक ही राशि में जन्म लेने वाली महिला कर्कश बोलने वाली तथा हीन स्वस्थ्य वाली भी बतायी गयी गयी है. एवं उसी राशि में जन्म लेने वाली महिला मधुर बोलने वाली एवं आकर्षक व्यक्तित्व वाली बतायी जा रही है.
इसीलिए ज्योतिष पितामह महर्षि पाराशर एवं आचार्य वाराह मिहिर ने स्पष्ट कह दिया है कि
“लिंगोद्भावेन्नयितुम बहुभिः फलेन कथ्यताम्रश्मि खलु राश्यानुकारी. विभेदोद्भिदः जातक नास्ति पपात तथ्याभ्येको तर सूक्ष्मतः नातिजातः.
अर्थात राशिफल में वर्णित लिंग (यथा स्त्रीलिंग या पुल्लिंग के अनुरूप) का फल उसी समुदाय विशेष के लिए है. न कि व्यक्ति विशेष के लिए. अतः राशिफल किसी एक व्यक्ति के लिए कहने के पहले सूक्ष्मता पूर्वक अन्य तथ्यों का विभेदात्मक अवलोकन करें. अर्थात नक्षत्र, लग्न, योग एवं अपवाद आदि का अध्ययन करने के बाद ही किसी का भविष्य फल कहें. एक व्यक्ति के लिए राशिफल कहने से ज्योतिष जैसे महान समृद्ध, ठोस, पूर्ण एवं सर्वथा सत्य विज्ञान की मान हानि होती है.
Pundit R. K. Rai
M.Sc. (Biochemistry)
M.A. (Vedic Astrology)
Former Interviewer- NCAER (A Home ministry Enterprises)
Tele- 0532-2500272, Mobile- 9889649352

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