वेद विज्ञान

वेद केवल धर्म नहीं बल्कि जीवन की सच्ची राह है

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क्या नीलम सदा मध्यमा में ही धारण करें?

Posted On: 10 Feb, 2014 ज्योतिष में

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क्या नीलम सदा मध्यमा में ही धारण करें?
=======यह पोस्ट पढ़ कर आप को अटपटा लगेगा और परम्परागत विधि विधान के विपरीत प्रतीत होगा=====
कारण यह है कि आप ने आज तक यही पढ़ा एवं सुना होगा कि प्रत्येक रत्नो एवं नगो को पहनने के लिये अंगुलियां पहले से ही निर्धारित है. इस सम्बन्ध में मैं किसी ज्योतिषी या पण्डित को दोष न देते हुए केवल कलिकाल के कुप्रभाव को ही दोष दूँगा। यद्यपि इसका विवरण मैंने किसी एक ग्रन्थ में नहीं पढ़ा है किन्तु यदि नारद पुराण, नारद संहिता, वायु एवं वराह पुराण, वृहद् तार्जनियम, करवल्लरी, सामंजस्य वैभवम् आदि उत्तर एवं दक्षिण भारतीय ग्रंथो का सावधानी के साथ सूक्षमता पूर्वक अवलोकन किया जाय तो बहुत सारे रहस्य अनावृत्त हो जाते है. ज्योतिष महाविज्ञान के उद्भट्ट एवं मूर्द्धन्य प्राचीन विद्वान आचार्य वराह मिहिर ने भी कूट शब्दो में इनका उल्लेख किया है.
मैं यहाँ नीलम के बारे में संक्षेप में बताना चाहता हूँ जिसके बारे में एक श्रद्धालु ने जिज्ञासा प्रकट की है====
==शनि यदि वैवाहिक जीवन को प्रभावित करता है तो==
कुण्डली में शनि यदि सूर्य के सप्तमांश में हो तो अंगूठी न बनवाकर लाकिट में धारण करें।
शनि यदि चन्द्रमा के सप्तमांश में हो चूडा बनवाकर उसमें नीलम को मंढवायें।
शनि यदि मंगल के सप्तमांश में हो तो इसे तर्जनी अंगुली में धारण करें।
शनि यदि बुध के सप्तमांश में हो तो कनिष्ठिका अंगुली में धारण करें।
शनि यदि गुरु के सप्तमांश में हो तो मध्यमा में धारण करें।
शनि यदि शुक्र के सप्तमांश में हो तो अनामिका में धारण करें। शनि यदि स्वयं के सप्तमांश में हो तो अंगुष्ठ में धारण करें।
==शनि यदि व्यवसाय को प्रभावित करता है तो==
यदि शनि सूर्य के दशमांश में हो तो मध्यमा अंगुली में धारण करें।
यदि शनि चन्द्रमा के दशमांश में हो तो अंगुष्ठ में धारण करें।
यदि शनि मंगल के दशमांश में हो तो चूडा में धारण करें।
यदि शनि बुध के दशमांश में हो तो तर्जनी में धारण करें।
यदि शनि गुरु के दशमांश में हो तो लाकिट बनवा लें.
यदि शनि शुक्र के दशमांश में हो तो अनामिका में धारण करें। यदि शनि स्वयं के दशमांश में हो तो कनिष्ठिका में धारण करें।
==शनि यदि स्वास्थय को प्रभावित करता है तो==
शनि यदि सूर्य के त्रिशांश में हो तो नीलम कनिष्ठिका में धारण करें।
शनि यदि चन्द्रमा के त्रिशांश में हो तो तर्जनी में धारणा करें।
शनि यदि मंगल के त्रिशांश में हो तो मध्यमा में धारण करें।
शनि यदि बुध के त्रिशांश में हो तो लाकिट बनवा लें.
शनि यदि गुरु के त्रिशांश में हो तो चूड़ा बनवा लें.
शनि यदि शुक्र के त्रिशांश में हो तो अनामिका में धारण करें।
शनि यदि स्वयं के त्रिशांश में हो तो अंगुष्ठ में धारण करें।
=शनि यदि शिक्षा-प्रतियोगिता में बाधक हो तो==
शनि यदि कुण्डली में सूर्य के द्वादशांश में हो तो चूड़ा बनवा लें.
शनि यदि चन्द्रमा के द्वादशांश में हो तो तर्जनी में धारण करें।
शनि यदि मंगल के द्वादशांश में हो तो मध्यमा में धारण करें।
शनि यदि बुध के द्वादशांश में हो तो अनामिका में धारण करें।
शनि यदि गुरु के द्वादशांश में हो कनिष्ठिका में धारण करें।
शनि यदि शुक्र के द्वादशांश में हो तो लाकिट बनवा लें.
शनि यदि स्वयं के द्वादशांश में हो तो अंगुष्ठ में धारण करें।
पण्डित आर के राय
Email- khojiduniya@gmail.com

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