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ऐसे फल कथन का क्या तात्पर्य?

Posted On: 20 Feb, 2014 ज्योतिष में

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ऐसे फल कथन का क्या तात्पर्य?
शुक्र कुण्डली में सातवें मीन राशि में उच्च का होकर पञ्चमहापुरुष योग बना रहा है. तो आप ने इस पञ्चमहापुरुष योग के जितने फल होते है, उसे आप ने बता दिया। आप ने यह भी देख लिया कि छठे भाव में सूर्य भी अच्छा ही फल करेगा। आप ने यह भी देखा कि ग्यारहवें भाव में नीच का उग्र ग्रह मंगल भी बहुत अच्छा फल देगा। क्योकि “लाभे पापा प्रशस्ताः” के अनुसार लाभ भाव में पापग्रह बहुत अच्छा फल देते है. इसके अलावा आप ने देखा कि शनि आठवें भाव में आयु की वृद्धि कर रहा है. तथा षष्ठेश का आठवें भाव में होना “हर्ष” नामक बहुत अच्छा योग बनाता है. यही नहीं व्ययेश का छठे होना विमल योग बनाता है. और इस प्रकार सब फल कथन आप ने कर दिया।
और फल कहने का यह सबसे गलत एवं झूठा प्रकार है. समस्त भविष्य वाणी गलत होगी।
अभी आप देखें कहाँ कहाँ गलती किये है.
(1)=“प्राग्भुक हतो वा रिपवे व्ययशो दुर्दिन कारकम।
रन्ध्रे खेटोग्राः पापा वा दुःखदारिद्र्य नाशनम्।।”
अर्थात व्यय भाव का स्वामी छठे भाव में शुभ फल दे सकता है किन्तु यदि वह उग्र या पाप ग्रह न हो.
ध्यान रहे लग्न के आगे पीछे अशुभ राशियाँ या अशुभ ग्रह सदा अशुभ फल देने वाले होते है. देखें भाष्कर भट्ट कृत वृहद् खेटचरितम। वैसे भी शरीर के केंद्र विन्दु के चतुर्दिक किरणो के विकिरण में व्यतिरेक उत्पन्न करने वाला कारक ( Dazzling deviation of the sparking radiation from the different stars diverted/ absorbed/reflected as per the nature of the arch=RASHI) प्राथमिक स्तर पर ही समस्त अशुभ फलो का कारण हो जाता है. क्योकि जब शरीर ही चारो तरफ से अशुभ रश्मियों से आच्छादित रहेगा तो शेष फल के उत्तम होने पर ग्रहण लग जाता है.
(2)=इस सूर्य को अष्टमेश एवं तृतीयेश मंगल अपनी नीच (अष्टम) दृष्टि से देख रहा है. जो छठे भाव का तो शुभ फल दे सकता है किन्तु सूर्य की अशुभता को भी बढ़ा रहा है.
(3)= शनि आठवें आयु अवश्य बढ़ाता किन्तु यह नीच राशि का है तथा आठवें भाव में सर्वाष्टक वर्ग में 8 अंक प्राप्त कर रहा है. ध्यान रहे तीसरे, छठे, आठवें एवं बारहवें भाव में 3 से अधिक अंक आना अशुभता का सूचक है.
(4)= सन्तान एवं विद्या भाव को नीचस्थ मंगल अपनी उच्च राशि मकर में देख रहा है. तथा सन्तान एवं विद्या भाव का स्वामी शनि अपनी नीच राशि मेष में अशुभ भाव में बैठा है.
(5)=== सूर्य कुम्भ राशि में 28 अंशो से अधिक में है (10:28:58:47) तथा शुक्र मीन राशि में 1 अंश से भी कम (11:00:12:05) में है. इस प्रकार शुक्र पूर्णतया अस्त है. फिर वह किस तरह महापुरुष योग का फल देगा?
“खेशः अभिहतो खेटः नेवापि योगं प्रभुञ्ज्यते।”
इसके बावजूद भी आप सोचते है कि आप ने सही फल कथन किया है. या आप सही है. तो मैं आप को चुनौती नहीं दे सकता। आप की जो इच्छा। वैसे मुझे इस विषय पर कुछ नहीं कहना चाहिए था. क्योकि आज कल कुण्डली का फल ही इसी तरह बताया जा रहा है. और लोग झटपट फल जानने को उतावले है. तो फल तो ऐसे ही बताया जा सकता है.
पण्डित आर के राय
Email- khojiduniya@gmail.com

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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
February 24, 2014

पंडित जी प्रणाम ,आपने सच कहा कुछ ज्योतिषी अल्प ज्ञान के साथ फल कथन कर रहे हैं ,जो कि खतरनाक होता है ,उपयोगी जानकारी देने के लिए बहुत आभार ,सादर ,निर्मल

sanjay kumar garg के द्वारा
February 21, 2014

पंडित जी, प्रणाम! विरश्चिक लग्न में, नवम भाव में नीच के मंगल जातक में केसा प्रभाव डालेगें!


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