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भारत, विज्ञान एवं ज्योतिष====एक विडम्बना

Posted On: 2 Mar, 2014 ज्योतिष में

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भारत, विज्ञान एवं ज्योतिष====एक विडम्बना
+++++एक बार संयुक्त राष्ट्र में प्रत्येक देश के पुलिस का सम्मलेन हुआ.+++++
======पहले ब्रिटेन की पुलिस से पूछा गया कि तुम किसी चोरी का पर्दाफास कितने समय में कर सकते हो?  उन्होंने बताया एक महीने में. जर्मनी की पुलिस ने कहा कि पंद्रह दिनों में वह चोर का पता लगा लेगी। कनाडा पुलिस ने कहा कि वह एक सप्ताह में चोर को पकड़ लेगी। आस्ट्रेलिया की पुलिस बतायी कि वह दो दिनों में चोर को पकड़ लेगी। स्विट्जर लैण्ड की पुलिस बतायी कि वह इसका पता चौबीस घंटे में लगा लेगी।
++++++++++++जब भारत की पुलिस से पूछा गया कि तुम चोरी का पता कितने समय में लगा लोगे। तो उसने बताया कि ———
+++++++++++”हमें तो चोरी का पता पहले से ही रहता है. इसमें पता क्या लगाना है?”++++++++++
जी हाँ, भारत की पुलिस को चोरी का पता क्या लगाना? वह तो स्वयं इसमें भागीदार है. उसे तो सब कुछ पहले से ही पता होता है.
किन्तु ठीक इसके विपरीत———
भारत का मौसम पूर्वानुमान एवं भूगर्भ विज्ञान विभाग भूकम्प, बादल फटने तथा महामारी का पता इन सबके गुजरने के बाद लगाता है कि भूकम्प की तीव्रता रेक्टर स्केल पर इतनी थी.
या====
अगर इसने भविष्य वाणी कऱ दी कि अगले तीन दिन में बंगाल की खाड़ी में उठे चक्रवात के कारण उत्तर भारत में जोर की वर्षा होगी। और यदि नहीं हुई तो बताता है=====
“अचानक चक्रवात का रुख परिवर्तित हो गया और वह दक्षिण पूर्व की तरफ अग्रसर हो गया जिससे वर्षा नहीं हुई.”
करोडो अरबो रुपये खर्च कर इन विभागो की स्थापना महज इस लिये की गई है ताकि बड़े बड़े मंत्रियो एवं अधिकारियो के सगे सम्बन्धी ऊँचे वेतन पर इसमें नौकरी पायें तथा इनके निर्माण एवं रख रखाव का ठेका बड़े बड़े औद्योगिक घरानो एवं पूंजीपतियों को मिले ताकि देश को लूटा जा सके.
+++++++++++किन्तु यदि किसी ज्योतिषी ने कोई भविष्य वाणी की और वह सही नहीं हुई तो बड़े लाउड स्पीकर लगाकर, प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रानिक मीडिया एवं एजेंटो से इसका प्रचार करवाया जाएगा कि ज्योतिष और कुछ नहीं बल्कि एक पाखण्ड, ढकोसला एवं बिना किसी आधार प्रमाण का साहित्य है.
ज़रा इसी जागरण जंकशन मंच पर प्रकाशित मेरा ब्लॉग ” किसी बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठान्न या उसके मुखिया का पतन ठीक होली के पूर्व” शीर्षक से 3 दिसंबर 2013 को प्रकाशित हुआ है.
और मुझे अभी पता चला है कि सहारा प्रमुख सुब्रत रॉय को कारावास हो गया तथा उनके प्रमुख प्रतिष्ठान्नो को बंद कर दिया गया.
इस पर मुझे बहुत टीका टिप्पड़ी सुनने को मिली थी.
किन्तु मैं तो लगभग इसका आदती हो चुका हूँ.
पण्डित आर के राय

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1 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sanjay kumar garg के द्वारा
March 3, 2014

आदरणीय पडित जी, सादर नमन! आपके उस ब्लॉग को मैंने पढ़ा था! परन्तु मैं तारीख भूल गया था! ऐसे भयिष्य कथनात्मक भविसयवाणी कम पढ़ने को मिलती हैं, आभार! पंडित जी! पंडित जी, मुझे ज्योतिषीय दिशा निर्देेशन नहीं मिल रहा, क्या आप मेरा दिशा निर्देशन कर देंगें????


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