वेद विज्ञान

वेद केवल धर्म नहीं बल्कि जीवन की सच्ची राह है

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आधुनिक विज्ञान वेद की चरणपादुका है

Posted On: 26 Jul, 2014 ज्योतिष में

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आधुनिक विज्ञान वेद की चरणपादुका है
श्री विभवनाथ आचार्य जी
=====आप ने गलत पाठ किया है. और इसका अनर्थ ही होगा।
“द्रुह्यानुवाश्च गवितो तुर्यन्तं नॉर्वास्याप्तिः तमेव गव्यम्।”
यदि व्याकरण का सम्यक ज्ञान हो तो देखें-
नौ स्पर्शत्वात् यमेति नव्यत्।
हलन्त्यत्वा नव्येति।
सुप्तिङ्गन्तम पदमेति नव्यम्।
=====अब मन्त्र पाठ करें++++
ॐ उग्ग्रं लोहितेन मित्रम्म् सुवृत्त्येन रुद्रन्दौव्व्रत्येनेन्द्रम्प्रकीडेन मरुतो बलेन साद्धयान् प्प्रमुदा। भवस्य कण्ठ्यं रूद्रस्यान्तः पाश्व्यर्म्महादेवस्य यकृच्छशर्व्वस्य व्वनिष्टुः पशुपतेः पुरीतत्।
(रुद्राष्टाध्यायी अध्याय 7 मन्त्र 3)
अर्थ देखें—
लोहित द्वारा उग्र को, श्रेष्ठ कर्मो से मित्र देवता को, दुर्वृत्त्य से रूद्र को, क्रीड़ा करने में समर्थ रक्त से इन्द्र को, बलप्रकाशन में समर्थ रक्त से मरुतो को, हर्षित से साध्य देव को, कण्ठ से भव को, पार्श्व की मध्य रक्तिमा से रूद्र को, यकृत के रस से महादेव को, स्थूलांत्र से शर्व को, नाड़ी रक्तिमा से पशुपति को प्रसन्न करता हूँ.
=====विचार करें—
(1)– पहले रूद्र को दुर्वृत्त्य से और उसके बाद पार्श्व की मध्य रक्तिमा से रूद्र को प्रसन्न का क्या नियोजन-प्रयोजन?
(2)– रक्त के चार प्रकार स्पष्ट कर दिये गये है—
(अ)- क्रीड़ा करने में समर्थ रक्त जिससे इन्द्र प्रसन्न होते है.
(ब)–बलप्रकाशन में समर्थ रक्त जिससे मरुत देव प्रसन्न होते है.
(स)–पार्श्व की मध्य रक्तिमा जिससे रूद्र प्रसन्न होते है.
(द)–नाड़ी की रक्तिमा से महादेव प्रसन्न होते है.
===========आज हजारो लाखो साल बाद आधुनिक चिकित्सा विज्ञान जान पाया है कि रक्त के चार प्रकार होते है—
(1)-A , (2)-B , (3)-AB , और (4)- O
========श्री आचार्य जी थोड़ा प्रयत्न कीजिये, थोड़ी रूचि दिखाइये, थोड़ा अध्ययन कीजिये, वेदमंत्रों की गुरुता, महिमा एवं सर्वोत्कृष्टता स्थापित कीजिये। आप लोगो को स्वदेशी-विदेशी चंदे एवं प्रशिक्षण संस्थान चलाने से धन भी प्राप्त हो रहा है. उसका सदुपयोग कीजिये। अशुद्ध मंत्रोच्चार से परिणाम कितना भयंकर हो सकता है, इसे समझाइये।
====मैं तो वैसे न कोई शास्त्री हूँ, न आचार्य। ऊपर से क्रूर कर्मा फौजी। न तो संयम है न धैर्य। और न ही मुझे इस विषय से सम्बंधित कार्य करने की अनुमति है. इसके अलावा मेरे पास साधन भी नहीं है. न मेरा कोई “आफिस” है न कोई “दूकान” न ही कोई आश्रम है न कोई संस्थान।
++++बस अपने अर्जित अल्प ज्ञान का ढिंढोरा इस नेटमीडिया पर पीट रहा हूँ.
पण्डित आर के राय
Email- khojiduniya@gmail.com

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