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ह्रदय रोग:ग्रह एवं उपचार

Posted On: 27 Nov, 2014 ज्योतिष में

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ह्रदय रोग:ग्रह एवं उपचार
सप्तमेश यदि पाप ग्रह हो तथा राहु के साथ लग्न में बैठे, भले वह पापग्रह स्वगृही ही क्यों न हो?
==द्वितीयेश पाप ग्रह हो तथा शनि के साथ चतुर्थ भाव में बैठे
===मंगल यदि षष्ठेश हो तथा चन्द्रमा के साथ लग्न में हो
===बुध यदि अष्टमेश हो तथा लग्न में मंगल-शनि के साथ युति बनाये
===पंचमेश छठे में, सप्तमेश आठवें में, लग्नेश बारहवें हो
===षष्ठेश-अष्टमेश की युति लग्न में या अष्टमेश-व्ययेश की युति चतुर्थ में या षष्ठेश-व्ययेश की युति सप्तम भाव में हो तो ह्रदय रोग अवश्य होता है.
उपचार- यदि यह निश्चित हो जाय कि किस ग्रह के कारण रोग है तो उस ग्रह वाले दिन (राहु का मंगलवार एवं केतु का बुधवार होता है) नीले थोथे में कशीश भस्म समान मात्रा में आटे में मिलाकर एक अस्पष्ट कालिका की आकृति बनावें। आकृति किसी भी हालत में आठ अंगुल से छोटी न हो. उसके सम्मुख गूगल, लोबान, घी और तिलकी 108 आहुति उदुम्बर की जलती लकड़ी में निम्न मन्त्र से डालें–
“ॐ क्लीं भयातुरस्याश्रया कालिका देव्यै स्वाहा।”
उसके बाद वज्रदन्त के पाँच रत्ती के टुकड़े को शुद्ध पाँच मौक्तिक रुद्राक्ष के साथ लाकिट बनवाकर गले में डाल लें.
और अनिवार्य रूप से -
अर्जुन की छाल 8 किलो
वंशपत्री एक पाव
अशोक की छाल 5 किलो
शीलापीर एक पाव
अवरोंचा की छाल 2 किलो
इन सबको कूट पीस कर चार हिस्से में बाँट लें.
एक हिस्से में एक छटाँक खदिर का चूर्ण डालकर 6 किलो पानी में तब तक पकायें जब तक लगभग एक पाव पानी शेष न रह जाय. उसे उतार कर ठण्डा करें तथा अच्छे साफ़ कपडे की सहायता से अच्छी तरह निचोड़ कर पानी को एक जगह रखें।
इसी प्रकार दूसरे हिस्से को विशुलावना एक छटाँक मिलाकर 6 किलो पानी, तीसरे हिस्से को अवरोचिका की जड़ एक पाव मिलाकर 6 किलो पानी तथा चौथे को एक पाँव शतावरी मिलाकर 6 किलो पानी में गर्म कर एक एक पाव पानी शेष रहने पर पानी को अच्छी तरह निचोड़ कर रख लें. इस निचोड़े एक किलो पानी को मिटटी के बर्तन में इतनी देर तक हलकी आंच में पकाये कि एक पाव पानी शेष बचे.
इस पानी में—
एक तोला हरताल
एक तोला रौप्यभस्म
एक तोला स्वर्ण भस्म
एक तोला वज्र भस्म तथा
एक तोला पन्नग भस्म
मिलाकर अच्छी तरह तीन चार घंटे तक घोंट कर मिलाएं। उसके बाद उसे छाये में सुखाकर एक एक रत्ती की गोलियाँ बना लें. प्रतिदिन शुद्ध अर्जुन के दो चम्मच रस के साथ खायें।
परिणाम दूसरे दिन से ही पता लगने लगेगा।
पण्डित आर के राय
Email-khojiduniya@gmail.com

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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sanjay kumar garg के द्वारा
December 4, 2014

आदरणीय पंडित जी, सादर नमन! औषधि तो अच्छी परन्तु इसे बनाना तो काफी कठिन लगा रहा है, क्या ये बनी हुई भी मिल सकती हैं? धन्यवाद आदरणीय पंडित जी!

    December 8, 2014

    श्री गर्ग जी, मैंने रिस्क लेकर ही इसका भी प्रयोग किया था. किन्तु बहुत कम मात्रा में प्रयोग किया था. क्योकि यह बहुत महँगा उपादान है.


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