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पारद शिवलिंग एवं संस्कार

Posted On 31 Dec, 2016 ज्योतिष में

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पारद शिवलिंग वेदविज्ञान

पारद शिवलिंग
लगभग हजारों लोगों के विशेष आग्रह पर पारद शिवलिंग के सम्बन्ध में उत्पन्न भ्रम के निवारण हेतु यह वर्णन प्रस्तुत है.
एक शब्द आता है अष्टसंस्कारित पारद शिवलिंग
संस्कार का तात्पर्य हुता है किसी चीज को धुलाई आदि के द्वारा साफ़ करना–
सम्यक कृतिनां अपाद्दुरितानि प्रक्रिया संस्कारमभिज्ञेयम
महर्षि मार्कंडेय ने पारद शिवलिंग के संस्कार के 18 प्रकार बताये हैं. —–
मृत्य्यावलुन्ठिनीमर्काद सिकतास्निग्ध्यमर्णतानिः मर्दनास्वाध्याक्तम केलिः संस्कारान्यष्टदसानि कथ्यते.
पांच आकृति सम्बन्धी
पांच रस धातु अनुपात सम्बन्धी
पांच निर्माण के मुहूर्त सम्बन्धी
तथा तीन क्रियान्वयन सम्बन्धी
आकृति- आकृति कितनी लम्बी हो या उसके रेती का उभार या परिमाप कितना हो आदि.
रस धातु अनुपात- कौन सा रस या धातु एक दुसरे के साथ कितनी मात्रा में मिलाई जाय
निर्माण मुहूर्त- ताम्बे एवं पारद का मिश्रण सोमवार को नहीं करना चाहिये. या कज्जल तथा अभ्रक का मिश्रण गुरूवार को नहीं करना चाहिये.
क्रियान्वयन- जैसे कैलाशी रूद्र को हल्दी, तथा गोहरू के मिश्रण में शहद मिलाकर धोना चाहिये. विद्याधरी शिवलिंग को घी, जीर्णक एवं तालीस पत्र के स्वरस के मिश्रण से धोना चाहिये. देखें कात्यायनी रस श्रृंगार सर्ग 76 श्लोक 34, 35 तथा 45, 46 एवं 47.
लेकिन बहुत पश्चात्ताप का विषय है कि कुछ पारद का कार्य करने वाले लोग एक शब्द जान गए- अष्ट संस्कारित पारद शिवलिंग लेकिन यह नहीं जान पाये कि —–
वज्रानुवासितं नदध्रुह जीर्णं क्लिष्ट स्निग्धं नृदधुः
तमाचरेदष्टं निष्कलितो पारदः दस महत्कृतम.
यदि लोह अ यस्क या अवजीर्णक कज्जल मिला होगा तो पूरा 18 संस्कार आवश्यक होगा. किन्तु यदि इसमें हीरा या वज्रमणि मिला होगा तो इसका मात्र तीन ही संस्कार हो पायेगा. मर्दन-स्वेदन एवं पुरश्चरण
—–
ताम्बा का रासायनिक सूत्र Cu तथा मृदुकर्ण का रासायनिक सूत्र Pt2436Pb6800 (OH24 Al2O68) होता है. जब इनका 200 डिग्री सेंटीग्रेड पर गर्म किया जाता है. तो वातावरण का हाइड्रोजन एवं नाइट्रोजन पराक्साइड इसके अयस्कों में से ताम्बा एवं शीशा को अनुवर्तन दीर्घा (Meclidemetrol Megafarct Orbit) में खींच देते हैं. तथा परावर्तित किरणें सुनहले रंग की दिखाई देने लगती है. किन्तु ध्यान रहे, यह शिवलिंग जहां पर रहेगा वहाँ कोई भी औरत गर्भ धारण नहीं कर सकती. कारण यह कि गर्भाशय का Lomocryte Cell इस यौगिक के क्युप्रिक लेडिहेलडाइड द्वारा अस्थाई रूप से नष्ट कर दिये जाते हैं. यदि कोई औरत जारज संतान उत्पन्न करना चाहती है तो RNA के नेक्लोथियोन इस बच्चे के अनेक अंगों को बनने ही नहीं देगें तथा लड़का मनुष्य की आकृति के अलग रूप में उत्पन्न होगा. ऐसी स्थिति में इस शिवलिंग के निर्माण में रूपक शैल या मेड्रोकार्बाईट के चूर्ण को पहले ही मिला देते हैं.
संलग्न चित्र में सबसे नीचे का कथन जो भिषगाचार्य यवतसेन का है, यही स्पष्ट करता है.
पारद शिवलिंग का संस्कार उसमें मिलाये गये धातु-रस आदि पर निर्भर करता है. प्रत्येक शिवलिंग का एक ही संस्कार-अष्टसंस्कार नहीं होता है. यूनान के प्रसिद्ध रस रसायन विशेषज्ञ हेराथारिंजी डेलोट भी इसी का अनुमोदन करते हैं.
किन्तु अल्पज्ञता या अनभिज्ञता या हठवादिता या अतिशय लोभ-पाप से ग्रसित होकर आज के तथा कथित पारद के कार्य करने वाले विशेषज्ञ लोगों के लाभ हानि का ध्यान न रखते हुए उलटे सीधे शिवलिंग पारद के नाम पर बेच रहे हैं. जिसका परिणाम यह हो रहा है की लोग विविध कष्ट, भय, बंधन एवं हताशा पूर्ण हानि से दुःख उठा रहे हैं.

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